Wednesday, 28 June 2017

चांदनी रात में कुछ फीके सितारों की तरह

चांदनी रात में कुछ फीके सितारों की तरह
याद मेरी हैं वहां गुज़री बहारों की तरह
ज़ज्ब होती रही हर बूंद मेरी आँखों में 

बात करता रहा वो हलकी फुहारों की तरह
ये बियाबां सही तनहा तो यहाँ कुछ भी नहीं
दूर तक फैलें हैं साये भी चिनारों की तरह
बात बस इतनी है इस मोड़ पे रस्ता बदला
दो कदम साथ चला वो भी हजारों की तरह
कोई ताबीर नहीं कोई कहानी भी नहीं
मैनें तो ख्व़ाब भी देखें हैं नजारों की तरह
बादबां खोले जो मैनें तो हवाएँ पलटी
दूर होता गया इक शख्स किनारों की तरह
फातिमा तेरी ख़ामोशी को भी समझा है कभी
वो जो कहता रहा हर बात इशारों की तरह
- फातिमा हसन

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