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Saturday, 1 July 2017

न जाने कैसा मौसम हो दुशाला ले लिया जाये- मुनव्वर राना

न जाने कैसा मौसम हो दुशाला ले लिया जाये
उजाला मिल रहा है तो उजाला ले लिया जाये

चलो कुछ देर बैठें दोस्तों में ग़म जरूरी है

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं- मुनव्वर राना

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी- चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते

आँखों में कोई ख़्वाब सुनहरा नहीं आता-मुनव्वर राना

आँखों में कोई ख़्वाब सुनहरा नहीं आता
इस झील पे अब कोई परिन्दा नहीं आता

हालात ने चेहरे की चमक छीन ली वरना

साथ अपने रौनक़ें शायद उठा ले जायेंगे- मुनव्वर राना

साथ अपने रौनक़ें शायद उठा ले जायेंगे
जब कभी कालेज से कुछ लड़के निकाले जायेंगे

हो सके तो दूसरी कोई जगह दे दीजिये

साथ अपने रौनक़ें शायद उठा ले जायेंगे

साथ अपने रौनक़ें शायद उठा ले जायेंगे
जब कभी कालेज से कुछ लड़के निकाले जायेंगे

हो सके तो दूसरी कोई जगह दे दीजिये
आँख का काजल तो चन्द आँसू बहा ले जायेंगे

कच्ची सड़कों पर लिपट कर बैलगाड़ी रो पड़ी
ग़ालिबन परदेस को कुछ गाँव वाले जायेंगे

हम तो एक अखबार से काटी हुई तसवीर हैं
जिसको काग़ज़ चुनने वाले कल उठा ले जायेंगे

हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिये
माँ, हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे


- मुनव्वर राना

गौतम की तरह घर से निकल कर नहीं जाते- मुनव्वर राना

गौतम की तरह घर से निकल कर नहीं जाते
हम रात में छुपकर कहीं बाहर नहीं जाते

बचपन में किसी बात पर हम रूठ गए थे

उसने लिक्खे थे जो ख़त कापियों में छोड़ आए- मुनव्वर राना

उसने लिक्खे थे जो ख़त कापियों में छोड़ आए
हम आज उसको बड़ी उलझनों में छोड़ आए

अगर हरीफ़ों में होता तो बच भी सकता था

मेरे कमरे में अँधेरा नहीं रहने देता- मुनव्वर राना

मेरे कमरे में अँधेरा नहीं रहने देता
आपका ग़म मुझे तन्हा नहीं रहने देता

वो तो ये कहिये कि शमशीरज़नी आती थी

Thursday, 29 June 2017

कभी ख़ुशी से खुशी की तरफ़ नहीं देखा- मुनव्वर राना

कभी ख़ुशी से खुशी की तरफ़ नहीं देखा
तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा

ये सोचकर कि तेरा इन्तज़ार लाज़िम है

नाकामियों की बाद भी हिम्मत वही रही- मुनव्वर राना

नाकामियों की बाद भी हिम्मत वही रही
ऊपर का दूध पी के भी ताक़त वही रही

शायद ये नेकियाँ हैं हमारी कि हर जगह

इसी गली में वो भूखा किसान रहता है- मुनव्वर राना

इसी गली में वो भूखा किसान रहता है
ये वो ज़मीन है जहाँ आसमान रहता है

मैं डर रहा हूँ हवा से ये पेड़ गिर न पड़े

कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता- मुनव्वर राना

कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर अच्छा नहीं लगता

अगर स्कूल में बच्चे हों घर अच्छा नहीं लगता

वो महफ़िल में नहीं खुलता है तनहाई में खुलता है- मुनव्वर राना

वो महफ़िल में नहीं खुलता है तनहाई में खुलता है
समुन्दर कितना गहरा है ये गहराई में खुलता है


जब उससे गुफ़्तगू कर ली तो फिर शजरा नहीं पूछा

चंद शेर-मुनव्वर राना

1.
हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं
जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं

2.
नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है

सबके कहने से इरादा नहीं बदला जाता- मुनव्वर राना

सबके कहने से इरादा नहीं बदला जाता
हर सहेली से दुपट्टा नहीं बदला जाता

हम कि शायर हैं सियासत नहीं आती हमको

मुसलसल गेसुओं की बरहमी अच्छी नहीं होती- मुनव्वर राना

मुसलसल गेसुओं की बरहमी अच्छी नहीं होती
हवा सबके लिए ये मौसमी अच्छी नहीं होती

न जाने कब कहाँ पर कोई तुमसे ख़ूँ बहा माँगे

मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता- मुनव्वर राना

मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
अब इससे ज़्यादा मैं तेरा हो नहीं सकता


दहलीज़ पे रख दी हैं किसी शख़्स ने आँखें

Wednesday, 28 June 2017

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं
उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा

ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा
लिबास ऐ ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा
शेयर बाज़ार में कीमत उछलती गिरती रहती है